Cow Urine Therapy (Ayurveda – Alternative and Complementary medicines) sees cancer as a multidimensional, systemic total body disease.The tumor is merely a symptom and the purpose of the Jain’ Cow Urine Therapy cancer treatment is to correct the root causes of cancer in the whole body along with malignant cells and tumor.

  • Approved by Drug Controller ISH&M MP Government  
  • United States FDA Approved FRN No. 10359104430
  • Patent No.189078  Awarded by Government of India

  A Research and Development:

CCRAS, research wing of AYUSH  (Government of India) has researched on herbs for its anti cancer properties and pharmacological activities as per modern science. These herbal extracts which have established anti-cancer properties are processed with cow urine in a ultra modern Ayurvedic pharmaceutical industry.

Cow Urine has been researched and patented for its ability to improve efficacy and absorption of anti cancer drugs of modern medicine (allopathic) and herbal extract. Hence our Ayurvedic medicines made of cow urine and herbal extracts are effective for Cancer.

The Cancer Ayurvedic medicines based on cow urine therapy have scientifically established pharmacological activities based on research making them effective and helpful in the disease.

Anticancer : Drug, food or lifestyle habit that works to prevent or treat cancer.
Antineoplastic : Herbs that prevent formation or destroy tumor cells.
Antitumor : It inhibit and combat the development of tumors /neoplasm.
Anti-inflammatory : It reduces inflammation and hence remedying pain.
Antioxidant : Antioxidants are substances that may protect your cells against the effects of free radicals. Free radicals are molecules produced when your body breaks down food, or by environmental exposures like tobacco smoke and radiation. Free radicals can damage cells, and may play a role in heart disease, cancer and other diseases.
Analgesic : Acts as a Painkiller.
Antipyretic : It reduces body temperature in situations such as fever.
Antispasmodic : It suppresses spasms (i.e. a sudden, involuntary contraction of a muscle, a group of muscles, or a hollow organ, or a similarly sudden contraction of an orifice. It is sometimes accompanied by a sudden burst of pain).
Anti-stress : Enhance Stress Management and avoid mental stress.
Antibacterial : Kills or slows down the growth of bacteria.
Immunostimulator : It also has Cytotoxic effect on monolayer cell line from a mouth carcinoma,Hence it is very useful in all types of Cancer, cyst, fibroid, Benign and malignant tumors and neoplasm, submucous fibrosis, Aplastic anemia, Leukemia, Blastoma,  arcoma, Lymphoma and Multiple Myeloma. It also acts as a restorative after severe illness, exhaustion and physical debility during cancer. Anemic condition after chemotherapy and radiations.

 Medical Review:

Cancer patients who were treated by modern medicines, yet no results were obtained and a life expectancy of 6, 8 or 12 months was given. Further told now there is no treatments possible! Such patients were treated by Ayurvedic Cow Urine Therapy. Their life expectancy which was told to be 6 – 12 months improved to 4 – 6 years and lived a good quality of life. Patients taking treatment with faith and confidence are received good results. A study conducted on 150 male and 100 female patients who were suffering from different types of cancer resulted in about 73.3 percent relief in physical sufferings.

 काऊ यूरिन थैरेपी से कैंसर का इलाज 

गोमूत्र एवं जड़ी-बूटि आधरित वैकल्पिक आयुर्वेद चिकित्सा में विविध लक्षणों से युक्त त्रिदोषज, सप्तधातुनाशक तथा सम्पुर्ण शरीर में व्याप्त होने वाली घातक बीमारी है | अबुर्द या गठान तो कैंसर की पहचान है | इसलिए इस वैकल्पिक चिकित्सा जगत में शरीर में व्याप्त कैंसर व्याधि को समूल नष्ट करने का चिकित्सा का प्रावधान निहित है
कैंसर संबंधी अन्तरराष्ट्रीय अनुसंधान एजेंसी के मुताबिक हर साल लगभग 67 लाख लोग कैंसर की बीमारी से पूरी दुनिया मे मारे जाते है | लगभग एक करोड़ नए कैंसर रोगी हर वर्ष बढ़ते है, जिनकी संख्या सन् 2020 तक लगभग 1.5 करोड़ प्रतिवर्ष तक बढ़ सकती है |

विश्व के सभी देशो में कैंसर से ही सबसे ज्यादा लोगों की अकाल मौत होती है | वर्तमान में पश्चिमी चिकित्सा प्राणाली में कीमोथेरेपी, जैवविष एवं प्रतिरक्षावर्धी औषधियों से ही चिकित्सा की जाती है | अत्यधिक खर्चीली होने के साथ ही यह गंभीर शारीरिक दुष्परिणाम एवं शारीरिक अस्वस्थता भी पैदा करती है |

हमारे प्राचीन भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली मे कई एसी दुर्लभ जडी-बूटियाँ है, जिसकों गोमूत्र के साथ आनुपातिक औषधि मिश्रण बनाकर कैंसर रोगियों को देने से रोगियों मे कैंसर के कारण होने वाली तीव्र शोथयुक्त विनाशकारी परिवर्तनो को रोकते है | परिणाम स्वरूप कैंसर पैदा करने वाले कारको का क्षय होता है | एक अनुसंधान मे बताया गया है कि पाश्चात्य चिकित्सा प्राणाली मे 120 तरह के कैंसर प्रतिरोधी औषधियाँ है, जिनको बनाने के लिए 90 विभिन्न प्रकार के जडी-बूटि औषधियों का सक्रिय क्षारीय तत्व रुप परिवर्तन कर मिलाए जाते हैं  | भारतीय आयुर्वेद प्राणाली का मत है कि शरीर में जब वात, पित्त एवं कफ नामक तीनो दोषो का असंतुलन हो जाता है, तो अस्वस्थ्ता की स्थिति पैदा होती है | इसलिए त्रिदोषो को सम बनाने हेतु उचित आहार-विहार एवं आयुर्वेद सम्मत गोमूत्र एवं जडी-बूटियों से निर्मित औषधि ही इस उद्देश्य की पूर्ति मे सहायक है |

आज काउ यूरीन थैरेपी कम खर्च एवं बिना किसी शारीरिक दुष्प्रभाव के कैंसर के सफलतापूर्वक उपचार मे उपयोगी सिध्द हो रही है | इस चिकित्सा प्राणाली से कैंसर रोगी लाभ पा रहे हैं और उनकी उम्र भी बढ रही है, जबकि पाश्चात्य आधुनिक चिकित्सा प्राणाली से अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिलते हैं | आज की महंगी पाश्चात्य प्राणाली के ठीक विपरीत आयुर्वेद एवं योगा जैसी भारतीय पुरातन चिकित्सा से कैंसर भी हारने लगा है | इसी दिशा मे भारत ने भागीरथ प्रयास करते हुए गोमूत्र आधारित काष्ठ औषधियों से सफल एवं तत्काल प्रभावी कैंसर विरोधी औषधियों का निर्माण किया है, ताकि दुनिया भर मे कैंसर जैसी जान लेवा बिमारी से अमीर-गरीब सभी पीडित अधिक से अधिक स्वास्थ्य लाभ लेकर खुशहाल जीवन जी सकें |